UPSAC ने उत्तर प्रदेश सरकार से इलाके के अनुसार ठोस तथ्यों पर आधारित कृषि योजनाएँ लागू करने और सफल मॉडल्स को बड़े पैमाने पर अपनाने की सिफारिश की है। परिषद का उद्देश्य टिकाऊ खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाना और कृषि विकास को मजबूत करना है।
उत्तर प्रदेश राज्य कृषि परिषद (UPSAC) ने राज्य सरकार से कहा है कि किसानों की आय और खेती की सफलता बढ़ाने के लिए इलाके के अनुसार ठोस तथ्यों पर आधारित योजनाएँ बनाई जाएँ और सफल मॉडल्स को बड़े स्तर पर लागू किया जाए।
टिकाऊ खेती पर जोर
लखनऊ में हुई UPSAC की पहली बोर्ड बैठक में कई अहम प्रस्ताव पास किए गए। परिषद का कहना है कि खेती में उत्पादन को मुनाफे में, पैमाने को मूल्य में और विकास को टिकाऊ खेती में बदलने पर जोर दिया जाना चाहिए।
UPSAC के चेयरमैन घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा कृषि उत्पादक राज्य है और यहाँ टिकाऊ खेती के जरिए अपार संभावनाओं को खोला जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि UPSAC नीति सलाह देने वाला थिंक टैंक, सरकार-उद्योग-शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ने वाला मंच और निवेश, नवाचार व निर्यात को बढ़ावा देने वाला उत्प्रेरक बनेगा।
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बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक में बीजों की गुणवत्ता, पानी के बेहतर उपयोग, मिट्टी की सेहत, सस्ती दरों पर कृषि ऋण, फसल कटाई के बाद प्रबंधन और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
UPSAC के तुषार शर्मा ने बताया कि परिषद अब एक समाधान आधारित मंच के रूप में काम करेगी, जिससे नीतियाँ जमीन पर असर दिखा सकें। वहीं, UPCAR के महानिदेशक संजय सिंह ने भी क्षेत्र-विशेष योजनाओं और सफल मॉडल्स को दोहराने की जरूरत बताई। इन सुझावों को बाद में सरकार को भेज दिया गया।
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