सर्दियों में गन्ने की बढ़वार कम होना सामान्य है, इसे रोग या खाद की कमी न समझें। IISR के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एपी द्विवेदी के अनुसार दिसंबर–जनवरी में खाद डालने की जरूरत नहीं होती, बस हल्की सिंचाई करते रहें। तापमान बढ़ते ही जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में गन्ने की बढ़वार फिर तेज हो जाती है।
सर्दियों के मौसम में जैसे ही गन्ने की फसल की बढ़वार धीमी होती है, कई किसान इसे किसी रोग या पोषण की कमी मान लेते हैं। इसी गलतफहमी में वे खेत में डीएपी और यूरिया जैसी रासायनिक खाद डालना शुरू कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह ज़रूरी नहीं है और कई बार यह नुकसानदेह भी हो सकता है।
बढ़वार कम होने की क्या है वजह?
लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) के वैज्ञानिक डॉ. एपी द्विवेदी बताते हैं कि दिसंबर और जनवरी के महीनों में गन्ने की बढ़वार स्वाभाविक रूप से बहुत कम हो जाती है। इसकी मुख्य वजह ठंड और कम तापमान होता है, न कि कोई बीमारी या पोषण की कमी।
बीच-बीच में हल्की सिंचाई करें
डॉ. द्विवेदी के मुताबिक, इस समय गन्ने में ज़्यादा खाद या किसी भी तरह के एग्रीकल्चरल इनपुट देने की जरूरत नहीं होती। सर्दियों में फसल एक तरह से सर्वाइवल मोड में रहती है। ऐसे में किसानों को बस इतना करना चाहिए कि बीच-बीच में हल्की सिंचाई करते रहें, ताकि फसल ठंड के असर से सुरक्षित रहे।
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कब तेज होगी बढ़वार?
उन्होंने बताया कि जनवरी के आखिरी हफ्ते या फरवरी के पहले हफ्ते में जैसे ही तापमान बढ़ता है, गन्ने की बढ़वार अपने आप फिर से तेज हो जाती है। उसी समय खाद और पोषण प्रबंधन पर ध्यान देना सही रहता है।
धीमी बढ़वार पूरी तरह सामान्य
न्यूज़ पोटली से बातचीत में डॉ. द्विवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तर भारत के अन्य राज्यों, जहां सर्दियों में तापमान काफी नीचे चला जाता है, वहां गन्ने की धीमी बढ़वार पूरी तरह सामान्य बात है। किसानों को इस दौरान घबराने की जरूरत नहीं है।उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि अगर सर्दियों में गन्ने की बढ़वार कम दिखे या बिल्कुल न दिखे, तो भी चिंता न करें। तापमान बढ़ते ही फसल फिर से तेजी से बढ़ने लगेगी। उस समय सही मात्रा में उर्वरक देने से बेहतर परिणाम मिलेंगे।
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