इस किसान दिवस 2025 पर पढ़िए उन किसानों की प्रेरक कहानियाँ, जिन्होंने तकनीक और नवाचार के सहारे खेती में कमाल किया है। अपनी मेहनत और स्मार्ट प्रबंधन से उन्होंने न केवल उत्पादन और कमाई बढ़ाई, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण की सुरक्षा का भी ध्यान रखा। उन्होंने यह दिखाया कि आधुनिक खेती में दृष्टिकोण और लगातार सीखने की भूख ही सबसे बड़ी ताकत है।
आइए न्यूज़ पोटली पर देखें उन दस किसानों की कहानियाँ, जिनसे आप भी बहुत कुछ सीख सकते हैं और आने वाले साल में खेती में कुछ नया कर सकते हैं।
1. यूपी के बाराबंकी के युवा किसान मयंक वर्मा
ये हैं यूपी के बाराबंकी के युवा किसान मयंक वर्मा, जिन्होंने कम संसाधनों से शुरुआत कर तकनीक और मेहनत के दम पर खेती को मुनाफेदार बना दिया। 2016 में मचान विधि से लौकी की खेती कर उन्होंने 1 एकड़ से 5 लाख रुपये कमाए। आज वे 25 एकड़ में आधुनिक, टिकाऊ खेती कर रहे हैं और उनकी सब्जियां IAS अधिकारियों तक पहुंचती हैं।
कम लागत, बेहतर उत्पादन और स्थाई खेती—मयंक आज नए जमाने के किसानों के लिए प्रेरणा हैं
2.असम के चिरांग ज़िले के किसान पद्म श्री सरबेश्वर बासुमतारी
“कोई भी ज़मीन खाली नहीं होनी चाहिए”—इसी सोच को साकार किया है असम के चिरांग ज़िले के किसान पद्म श्री सरबेश्वर बासुमतारी ने। सिर्फ 1 बीघा ज़मीन से शुरू हुआ उनका सफर आज एक मॉडल इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम बन चुका है, जहाँ धान, सब्ज़ी, मछली, बकरी, मुर्गी पालन और बागवानी एक साथ होती है। 2024 में पद्म श्री से सम्मानित सरबेश्वर बासुमतारी ने जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई, सोलर पंप और मल्टीक्रॉपिंग के ज़रिये न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ाई, बल्कि हज़ारों किसानों को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। उनका संदेश साफ है—सही तकनीक और समझदारी से छोटी ज़मीन भी बड़ा बदलाव ला सकती है।
3.बिहार के समस्तीपुर के सुधांशु कुमार
बिहार के समस्तीपुर के सुधांशु कुमार ने खेती को एक नई पहचान दी है। 1.5 लाख से ज्यादा फलदार पौधों—जिसमें 1 लाख केले के पौधे शामिल हैं—के साथ उनका खेत आज एक हाई-टेक एग्री लैब बन चुका है। आम, लीची, ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, नींबू और कटहल जैसी फसलों से वे 3–4 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर हासिल कर रहे हैं और अगला लक्ष्य 10 करोड़ है। ऑटोमैटिक ड्रिप, स्मार्ट फर्टिगेशन, सेंसर और वेदर स्टेशन जैसी तकनीकों से लैस उनका फार्म साबित करता है कि खेती विज्ञान और तकनीक से जुड़कर बड़े सपने पूरे कर सकती है। सुधांशु का संदेश साफ है—सही रणनीति हो तो 300 पौधों वाला छोटा किसान भी सफल बन सकता है।
4. यूपी के बहराइच के पुरस्कार विजेता किसान जय सिंह
बहराइच (यूपी) के पुरस्कार विजेता किसान जय सिंह 1983 से केले की खेती को नई पहचान दे रहे हैं। गहरी जुताई, ढैंचा से हरी खाद, सोलराइजेशन और गोबर की खाद जैसे प्राकृतिक तरीकों से वे बिना ज्यादा रसायन के स्वस्थ और मुनाफेदार खेती कर रहे हैं। उठी हुई क्यारियों में सही दूरी और दिशा में रोपाई, संतुलित पोषण और समय पर कीट नियंत्रण से उनकी फसल A-ग्रेड गुणवत्ता देती है। परंपरागत समझ और वैज्ञानिक सोच के मेल से जय सिंह ने साबित कर दिया कि टिकाऊ खेती ही किसान की असली ताकत है।
5. महाराष्ट्र के सोलापुर के 35 वर्षीय युवा किसान जनक
महाराष्ट्र के सोलापुर के 35 वर्षीय युवा किसान ने सहजन (मोरिंगा) और अनार की व्यावसायिक खेती से खेती की तस्वीर बदल दी है। आधुनिक तकनीक, ऑर्गेनिक और स्मार्ट फर्टिलाइज़र, RO फ़िल्टर पानी और CCTV मॉनिटरिंग के ज़रिये उन्होंने लागत घटाई और उत्पादन व गुणवत्ता बढ़ाई।हज़ारों की आमदनी से करोड़ों के टर्नओवर तक पहुँची उनकी यात्रा बताती है कि तकनीक, सही योजना और बिज़नेस सोच के साथ खेती युवाओं के लिए भी एक सफल भविष्य बन सकती है।
6. उत्तर प्रदेश के “पोटैटो किंग” भंवरपाल सिंह
उत्तर प्रदेश के “पोटैटो किंग” भंवरपाल सिंह से मिलिए। साल 2000 में सिर्फ 2 एकड़ से शुरुआत कर आज वे 150 एकड़ में वैज्ञानिक तरीके से आलू की खेती कर रहे हैं और सालाना ₹1–2 करोड़ की कमाई कर रहे हैं। 15–20 किस्मों के आलू उगाकर वे देश के कई राज्यों में बीज सप्लाई करते हैं। संतुलित पोषण, जैव उर्वरकों का इस्तेमाल और आधुनिक खेती के दम पर भंवरपाल सिंह आज प्रधानमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री से सम्मानित किसान हैं। उनकी कहानी बताती है कि खेती भी सफलता और सम्मान का मजबूत रास्ता है।
7. बिहार के कैमूर के प्रगतिशील किसान रविशंकर सिंह
कैमूर (बिहार) के प्रगतिशील किसान रविशंकर सिंह ने 80 एकड़ जमीन को समृद्धि का मॉडल बना दिया है। बागवानी, मत्स्य पालन, डेयरी, ऑर्गेनिक खेती और नेट हाउस को जोड़कर उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग से सालाना करीब ₹1 करोड़ का टर्नओवर खड़ा किया। ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, फसल विविधीकरण और संसाधनों के पुनः उपयोग से वे लागत घटाते हैं और मिट्टी की सेहत भी सुधारते हैं। रविशंकर सिंह की कहानी बताती है कि आधुनिक तकनीक के साथ खेती आज भी गांव में रहकर समृद्ध भविष्य बना सकती है।
8. यूपी के पिलीभीत के किसान सुखदीप सिंह लाडी
किसान दिवस पर पेश है सुखदीप सिंह लाडी की कहानी। पिलीभीत के 150 एकड़ के किसान सुखदीप कहते हैं कि खेती मेहनत नहीं, प्रबंधन है। वे गन्ना और अन्य फसलें उगाते हैं, हर काम के लिए अलग ट्रैक्टर रखते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता पर लगातार ध्यान देते हैं। गन्ना उनकी मुख्य कमाई है, जबकि इंटरक्रॉपिंग खर्च निकाल देती है। पांच बार प्रधान रह चुके सुखदीप सात मुख्यमंत्री पुरस्कार जीत चुके हैं। उनका संदेश है: “अगर विदेश में काम करने वाले आधा समय अपने खेत में दें, तो ये मिट्टी सोना उगाएगी।”
9. मध्यप्रदेश के खरगौन जिले के किसान संजय कुमार मंडलोई
मध्यप्रदेश के खरगौन जिले के किसान संजय कुमार मंडलोई ने दिखा दिया कि तकनीक अपनाने से खेती भी बड़ा कारोबार बन सकती है। 20 एकड़ जमीन पर रेज़्ड बेड और ड्रिप इरीगेशन से सोयाबीन और डॉलर चना की खेती कर वे सालाना 30–35 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल कर रहे हैं। जब कई राज्यों में सोयाबीन की बुवाई घट रही थी, तब संजय ने सही तकनीक से इसी फसल को मुनाफे का सौदा बना दिया। आज उनकी खेती न सिर्फ परिवार की तरक्की का आधार है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन चुकी है।
10. यूपी के सीतापुर के किसान हिमांशु नाथ सिंह
सीतापुर (उत्तर प्रदेश) के हिमांशु नाथ सिंह ने साबित कर दिया कि गन्ना भी नवाचार से ज़्यादा मुनाफा दे सकता है। नई-नई उन्नत किस्मों के साथ बीज उत्पादन, आलू-सरसों की सहफसली खेती और G9 केले की सफल खेती ने उनकी आमदनी को कई गुना बढ़ा दिया। गन्ने की उन्नत किस्में, सही खाद प्रबंधन, कम लागत की तकनीक और केले से प्रति एकड़ लाखों की कमाई—यही है उनका सफलता मंत्र। हिमांशु सिंह आज नए जमाने के Agro Hero हैं, जिनकी खेती किसानों के लिए एक सीख और प्रेरणा है।