सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य(MSP) बढ़ाने, निर्यात और एथनॉल आवंटन जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है, क्योंकि गन्ना किसानों का बकाया तेजी से बढ़ रहा है। खाद्य सचिव ने कहा कि अगले एक महीने में ऐसे फैसले लिए जाएंगे, जिससे उद्योग को राहत मिले और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सके।
नई दिल्ली। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा है कि सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य(MSP) बढ़ाने और चीनी उद्योग को राहत देने के अन्य उपायों पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि जनवरी के मध्य से गन्ना किसानों का बकाया तेजी से बढ़ने की आशंका जताई गई है।
ISMA ने क्या कहा?
भारतीय चीनी एवं जैव-ईंधन विनिर्माता संघ (ISMA) के मुताबिक, गन्ने का बकाया लगातार बढ़ रहा है। 30 नवंबर तक अकेले महाराष्ट्र में यह बकाया करीब 2,000 करोड़ रुपये पहुंच चुका था। मिलों का कहना है कि ज्यादा चीनी स्टॉक, उत्पादन लागत बढ़ना, एथनॉल के लिए कम आवंटन, घरेलू कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजार में ज्यादा उत्पादन के कारण उन्हें नकदी की दिक्कत हो रही है।
चीनी का MSP बढ़ाने पर विचार
ISMA की वार्षिक बैठक के दौरान खाद्य सचिव ने कहा कि सरकार को इस समस्या की समय-सीमा का अंदाजा है और अगले एक महीने में ऐसे फैसले लिए जाएंगे, जिससे उद्योग को राहत मिले और किसानों को समय पर भुगतान हो सके।
सरकार जिन विकल्पों पर विचार कर रही है, उनमें चीनी का MSP बढ़ाना, 15 लाख टन से ज्यादा चीनी निर्यात की अनुमति देना और एथनॉल के लिए अधिक आवंटन शामिल है। फिलहाल फरवरी 2019 से चीनी का MSP 31 रुपये प्रति किलो है, जिसे ISMA बढ़ाकर 41.66 रुपये प्रति किलो करने की मांग कर रहा है।
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अतिरिक्त चीनी एक बड़ी चुनौती
सरकार ने माना है कि इस साल अतिरिक्त चीनी एक बड़ी चुनौती है। अनुमान है कि 2025-26 सीजन में देश में करीब 3.43 करोड़ टन चीनी का उत्पादन होगा। हालांकि एथनॉल के लिए केवल 28 प्रतिशत चीनी का ही उपयोग हो पा रहा है, जिससे लगभग 34 लाख टन चीनी ही एथनॉल में जाएगी।
15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दे चुकी सरकार
सरकार पहले ही उद्योग को राहत देने के लिए 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दे चुकी है। खाद्य सचिव ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अतिरिक्त स्टॉक न जमा हो और गन्ना किसानों को उनका पैसा समय पर मिले।
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि मौजूदा हालात 2018-19 जैसे हैं, जब गन्ने का बकाया 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था और सरकार को MSP बढ़ाने व निर्यात सब्सिडी देनी पड़ी थी। इस सीजन में अब तक 1 से 1.5 लाख टन चीनी निर्यात के लिए अनुबंध हो चुके हैं।
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