कानपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने ‘त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम’ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मक्का कम पानी में उगने वाली लाभकारी फसल है और सरकार किसानों को अनुदान, बीज, मशीन व तकनीकी सहायता देकर मक्का की खेती को बढ़ावा दे रही है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी।
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की ‘त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम’ योजना के तहत बुधवार को हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय, कानपुर में मक्का पर आधारित राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मौजूद रहे। उन्होंने किसानों, कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए मक्का की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
क्षेत्रफल के हिसाब से उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर
कार्यशाला में कृषि मंत्री शाही ने बताया कि मक्का उत्पादन के क्षेत्रफल के हिसाब से उत्तर प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। मक्का का इस्तेमाल पोल्ट्री फीड, पशु आहार, प्रोसेस्ड फूड, स्टार्च और इथेनॉल उत्पादन में होता है। साथ ही प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और उद्योग बढ़ने से होटल क्षेत्र में स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
मक्का का क्षेत्रफल 10.85 लाख हेक्टेयर
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में मक्का की खेती खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसम में होती है, लेकिन खरीफ इसका मुख्य सीजन है। इस समय प्रदेश में मक्का का क्षेत्रफल 10.85 लाख हेक्टेयर, उत्पादन 30.55 लाख मीट्रिक टन और औसत उत्पादकता 28.15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। रबी और जायद सीजन में मक्का का रकबा और उत्पादन बढ़ाने की अच्छी संभावनाएं हैं।उन्होंने कार्यशाला में यह भी बताया गया कि धान–गेहूं फसल चक्र के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अधिक दोहन, मिट्टी की सेहत खराब होना और खेती की लागत बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। मक्का की खेती को बढ़ावा देकर इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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कितना है बजट
आपको बता दें कि ‘त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम एक राज्य पोषित योजना है, जिसे चार वर्षों (2024-25 से 2027-28) तक प्रदेश के 75 जिलों में लागू किया जाएगा। योजना का कुल बजट 14,656.45 करोड़ रुपये है। वर्ष 2025-26 में 27.37 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
कई तरह के अनुदान दिए जाएंगे
योजना के तहत किसानों को कई तरह के अनुदान दिए जाएंगे जैसे देसी मक्का पर ₹3000 प्रति एकड़, संकर मक्का पर ₹4600 प्रति एकड़, पॉपकॉर्न मक्का पर ₹4600 प्रति एकड़, बेबी कॉर्न पर ₹16,000 प्रति एकड़ और स्वीट कॉर्न पर ₹20,000 प्रति एकड़ है। इसके अलावा, संकर बीज, मक्का छिलाई मशीन, बैच ड्रायर और पॉपिंग मशीन पर भी सब्सिडी दी जाएगी। किसानों को मक्का की खेती के लिए गोष्ठी, मेले, कार्यशालाएं और भ्रमण कार्यक्रमों के जरिए लगातार प्रोत्साहित किया जाएगा।
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