बांकुरा

बांकुरा की ईंटें: एक बिखरती ज़िंदगी की तस्वीर!

कभी मध्यम स्तर के उद्योगों की वजह से जानी जाने वाली पश्चिम बंगाल के बांकुरा की ज़मीन आज मज़दूरी और शोषण की मार झेल रही है। यहां की ईंट भट्टा इंडस्ट्री में हर साल नवंबर से उसके अगले साल मई तक करीब 40,000 मज़दूर काम करते हैं, लेकिन इनकी मेहनत का मोल ना के बराबर है।

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블로그 – 최신 뉴스

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जैविक खेती का पूरा इकोसिस्टम तैयार करेगी बिहार सरकार: कृषि मंत्री विजय कुमार सिंह

बिहार सरकार राज्य में जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए ‘कॉरिडोर आधारित परियोजना’ चला रही है। इसे राज्य के 13 जिले में लागू किया गया है । इसके तहत टिकाऊ खेती, मिट्टी की गुणवत्ता, जैविक उर्वरक के उपयोग और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर बल दिया गया है। किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिले इसके लिए हर साल जिला स्तर पर कम से कम 03 क्रेता-विक्रेता बैठक आयोजित किए जाते हैं।

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कपास के उत्पादन

कपास के उत्पादन में भारी गिरावट का अनुमान, आयात भी हुआ दोगुना

भारतीय कपास संघ (CAI) के मुताबिक़ घरेलू कपास उत्पादन में गिरावट के कारण सितंबर में समाप्त होने वाले 2024-25 सीजन के लिए भारत का कपास आयात दोगुना से भी ज़्यादा अधिक बढ़कर 33 लाख गांठ हो गया है, जिनमें से प्रत्येक का वजन 170 किलोग्राम है। पिछले सीजन में भारत का कपास आयात 15.20 लाख गांठ था। आयात में वृद्धि का कारण अनुमानित घरेलू उत्पादन से कम रहने की उम्मीद है, जबकि खपत स्थिर देखी जा रही है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

काशी में पीएम मोदी ने बनास डेयरी के पशुपालकों को दिया 106 करोड़ रुपये का बोनस, कहा ‘काशी मेरी है और मैं काशी का हूं’

बनास डेयरी ने काशी में हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति को बदला है, खासकर महिलाओं को सशक्त बनाकर. पूर्वांचल की अनेक बहनें अब लखपति दीदी बन चुकी हैं. पहले गुजारे की चिंता थी, अब उनके कदम खुशहाली की ओर बढ़ रहे हैं. इतना ही नहीं भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जिसमें पिछले 10 वर्षों में 65 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. बनास डेयरी काशी संकुल 1 लाख किसानों से दूध संग्रह कर रहा है और गीर गायों का वितरण कर पशुपालकों को सशक्त बना रहा है. काशी दौरे के दौरान पीएम मोदी ने ये बातें कहीं।

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गन्ने की फसल

गन्ने की फसल में बढ़ रहा है फड़का रोग का प्रकोप, गन्ना वैज्ञानिक से जानें उपचार के तरीके

गन्ना एक नकदी फसल है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। गन्ना किसानों की आय का एक मुख्य स्रोत भी है। आपको बता दें कि भारत में गन्ने की सबसे ज्यादा खेती उत्तर प्रदेश में होती है। यहां 28.53 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन पर गन्ने की खेती होती है, जिस पर लगभग 839 कुंटल प्रति हेक्टेयर गन्ने का उत्पादन होता है। वर्तमान में प्रदेश के किसानों ने ग्रीष्मकालीन गन्ने की बुवाई की हुई है। इस दौरान प्रदेश के कई जिलों में किसान फसल में पाइरीला का प्रकोप देख रहे हैं। पाइरीला को किसान फड़का रोग भी कहते हैं। इस रोग से बचाव के लिए प्रसिद्ध गन्ना वैज्ञानिक पद्मश्री बक्शीराम यादव ने किसानों को कुछ जरुरी टिप्स दिये हैं।

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बिहार सरकार

रबी 2024-25 मौसम के लिए ‘बिहार राज्य फसल सहायता योजना’ के तहत किसान 21 अप्रैल 2025 तक कर सकते हैं आवेदन

बिहार सरकार के सहकारिता विभाग की ओर से चल रही “बिहार राज्य फसल सहायता योजना” के तहत खरीफ मौसम 2024 के लिए पात्र किसानों के आंकड़ों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. योजना के तहत सबसे अधिक आवेदन पूर्वी चंपारण जिले से मिले हैं, जहां करीब 9 लाख 59 हजार 502 किसानों ने आवेदन किया. इसके साथ ही रबी 2024-25 मौसम के लिए भी किसानों से आवेदन लिए जाने की शुरुआत हो चुकी है. आपको बता दें कि ‘बिहार राज्य फसल सहायता योजना’ के लिए आवेदन प्रक्रिया 7 सितंबर 2024 से 18 नवंबर 2024 तक चली, जिसमें राज्य भर से कुल 9,59,502 किसानों ने आवेदन किया.

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हरियाणा

हरियाणा में बनेगा हाइड्रोपोनिक्स खेती के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’

हरियाणा और इजरायल ने बागवानी के क्षेत्र में खेती-किसानी में नए तकनीक को लेकर एक साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है. हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और इजरायल के कृषि और खाद्य सुरक्षा मंत्री एवी डिक्टर के बीच इंडो-इजरायल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल्स, घरौंडा (करनाल) में महत्वपूर्ण बैठक हुई. यह बैठक दोनों देशों के बीच नई दिल्ली में हुए कृषि सहयोग समझौते और कार्य योजना पर हस्ताक्षर के एक दिन बाद आयोजित की गई. इस बैठक में हाइड्रोपोनिक्स के क्षेत्र में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने पर सहमति जताई गई.

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जायद फसलों

ग्रीष्मकालीन बुवाई क्षेत्र में 15 प्रतिशत की वृद्धि, लेकिन तिलहन का रकबा लगभग स्थिर

इस समय देशभर में रबी फसलों की कटाई और जायद फसलों की बुवाई का काम चल रहा है। जायद सीजन में मुख्य रूप से मूंग, उड़द, मक्का और सब्जियों की खेती होती है। इसके अलावा कुछ जगहों पर दलहन और तिलहन फसलों के अलावा धान की भी खेती की जाती है।आपको बता दें कि जायद फसलों की बुवाई का सही समय मार्च से अप्रैल तक माना जाता है।

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बीटी कॉटन के बीजों की बढ़ती कीमतों पर राकेश टिकैत ने कृषि मंत्री चौहान को लिखा पत्र

बीटी कपास की बढ़ती कीमतों को देखते हुए बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर इस ओर ध्यान दिलाया है। राकेश टिकैत ने पत्र में कहा है कि केंद्र सरकार ने बीटी कपास के बीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का बेहद चिंताजनक फैसला लिया है। बीटी कपास की विफलता के कारण कपास की पैदावार में भारी गिरावट आ रही है और हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में कीटों, विशेष रूप से गुलाबी बॉलवर्म के हमले बढ़े हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।

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