भारत-ब्रिटेन

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते में किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा की गई: शिवराज सिंह चौहान

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता में किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा की गई। उन्होंने कहा कि इस समझौते से कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। भारत ने उन कृषि वस्तुओं पर शुल्क में कोई रियायत नहीं दी है जिनसे घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है। आलू, प्याज और अनाज जैसी प्रमुख वस्तुओं को इससे बाहर रखा गया है। तिलहन और मेवे भी इस सूची से बाहर हैं। इससे किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा सुनिश्चित होती है।

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बिहार सरकार

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए लागत पर 40 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है बिहार सरकार, इन जिलों के किसान कर सकते हैं आवेदन

यदि आप बिहार के किसान हैं और बागवानी फसलों की खेती करना चाहते हैं तो ड्रैगन फ्रूट की खेती कर सकते हैं. राज्य सरकार इसके लिए किसानों को लागत पर 40 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है. किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या अपने जिले के सहायक निदेशक, उद्यान के पास जाकर ड्रैगन फ्रूट की खेती, सब्सिडी के लिए आवेदन, अधिकतम क्षेत्रफल जैसी जानकारियां हासिल कर सकते हैं.

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भारी बारिश

ओडिशा, छत्तीसगढ़ समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, किसानों के लिए जारी हुई एडवाइजरी

भारतीय मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्क रहने तथा किसानों को अपनी फसलों का ध्यान रखने की सलाह दी है।आईएमडी के मुताबिक ओडिशा में 25 जुलाई को भयंकर बारिश की संभावना है। इसी तरह छत्तीसगढ़ में 25 और 26 जुलाई को बारिश होने संभावना है। 

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ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय किसानों को क्या लाभ, कौन से प्रोडक्ट इस समझौते से हैं बाहर ?

इस समझौते में घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए भारत के कुछ सबसे संवेदनशील कृषि क्षेत्र जैसे डेयरी उत्पाद, सेब, जई और खाद्य तेल शामिल नहीं होंगे। इन क्षेत्रों पर कोई टैरिफ रियायत नहीं है, जो खाद्य सुरक्षा और घरेलू मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देने की भारत की सोची-समझी व्यापार रणनीति को दर्शाता है। 

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2034 तक भारत में 22% चीनी का उपयोग इथेनॉल उत्पादन में होगा, अभी 9% चीनी का होता है इस्तेमाल: रिपोर्ट

भारत के संदर्भ में, रिपोर्ट में कहा गया है कि गन्ना आधारित इथेनॉल उत्पादन को इस क्षेत्र में विविधता लाने के सरकारी उपायों से समर्थन मिलेगा। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत, वैश्विक व्यापार में केवल 8 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ, ब्राज़ील और थाईलैंड के बाद चीनी निर्यातक के रूप में तीसरे स्थान पर बना रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के चीनी उत्पादन में इथेनॉल का लगभग 9 प्रतिशत उपयोग होता है और 2034 तक इसके 22 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है।

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यूपी

यूपी में तिलहन और दलहन के रकबे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, जानिए सोयाबीन, अरहर और मक्का का रकबा कितना बढ़ा?

उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान तिलहन और दलहन की खेती में तेजी देखी जा रही है। तिल, मूंगफली और सोयाबीन के रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसमें तिल की खेती में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है। अरहर किसानों के बीच एक लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है, जबकि धान, मक्का और कपास की खेती में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिससे खरीफ फसल के कुल रकबे में वृद्धि हुई है।

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संसदीय पैनल ने जैविक फसलों के लिए अलग MSP का दिया सुझाव

देश में टिकाऊ खेती को मुख्यधारा में लाने के लिए संसद की estimates committee ने एक विस्तृत, ठोस रोडमैप प्रस्तुत किया है, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की भूमिका पर ज़ोर दिया गया है ताकि जलवायु परिवर्तन और रसायनों के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न दोहरे खतरों के बीच उन्हें बदलाव का प्रमुख माध्यम बनाया जा सके। समिति ने सरकार को प्राकृतिक और जैविक खेती को आर्थिक रूप से व्यवहार्य, वैज्ञानिक रूप से मान्य और व्यापक रूप से अपनाया जाने वाला बनाने का सुझाव दिया है।

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बिहार सरकार

बिहार सरकार ने मछुआरों के लिए लांच किया नया पोर्टल, यहाँ ऑनलाइन कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन

बिहार सरकार ने राज्य के मछुआरों के लिए एक डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया है. जिसे NFDP यानी ‘नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म’ नाम दिया गया है. सरकार इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए क्षेत्र के असंगठित मत्स्य किसानों को एक पहचान देना चाहती है. इससे मछुआरों को सरकारी योजनाओं का डायरेक्ट लाभ भी मिल सकेगा.

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असमान बारिश

असमान बारिश के बाद फसल की कीमतों में आपूर्ति संबंधी झटके के लिए रहें तैयार: ICICI Bank

आईसीआईसीआई बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे भारत में असमान बारिश से निकट भविष्य में फसल की कीमतों में आपूर्ति संबंधी झटका लगने की आशंका है। कुछ राज्यों में जहाँ अत्यधिक वर्षा देखने को मिल रही है, वहीं अन्य राज्यों में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुँच सकता है। इसके बावजूद, कुल मिलाकर खरीफ की बुवाई में सकारात्मक वृद्धि देखी जा रही है, लेकिन क्षेत्रीय असमानताओं के कारण कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

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