एक बीघे से लाखों की कमाई

एक बीघे से लाखों की कमाई, जानिए मिर्च किसान छोटेलाल की कहानी

मिर्जापुर के किसान छोटेलाल सिंह ने मिर्च की खेती से अपनी जिंदगी बदल दी। वो बताते हैं कि सही जुताई, अच्छी खाद, गुणवत्तापूर्ण बीज, मल्चिंग और ड्रिप सिस्टम से फसल बेहतर होती है और लागत घटती है। एक बीघे में करीब ₹75,000 खर्च आता है, लेकिन मार्केट सही मिले तो ₹5–6 लाख तक का मुनाफा हो सकता है।

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कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बोले किसानों को मिलेगा फसल नुकसान का पूरा मुआवजा, आय बढ़ाने के नए रास्ते बताए

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीड में किसानों को भरोसा दिलाया कि बारिश से हुए फसल नुकसान का मुआवजा जल्द मिलेगा। उन्होंने फसल विविधता, प्रोसेसिंग, और इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि सरकार उर्वरक सब्सिडी सीधे किसानों के खाते में भेजने पर विचार कर रही है।

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कर्नाटक सरकार

गन्ना किसानों को बड़ी राहत, कर्नाटक सरकार ने बढ़ाया गन्ने का दाम

कर्नाटक में गन्ना किसानों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गन्ने का खरीद मूल्य बढ़ाकर ₹3,300 प्रति टन कर दिया है। किसानों ने ₹3,500 की मांग की थी, लेकिन सरकार के इस फैसले से उन्हें आंशिक राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर 2019 से अब तक गन्ने का MSP और इथेनॉल दरें न बढ़ाने का आरोप लगाया।

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गन्ना विकास विभाग तैयार करेगा 46 लाख बड पौध

यूपी: गन्ना विकास विभाग तैयार करेगा 46 लाख बड पौध, 3.20 लाख हेक्टेयर में होगी गन्ने की बुवाई

उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग ने शरदकालीन बुवाई के लिए 3.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ना लगाने और 46.1 लाख बड पौध तैयार करने का लक्ष्य रखा है। विभाग नई किस्मों को.लख. 16202 और को.शा. 18231 को बढ़ावा देगा। किसानों को स्वस्थ और रोग-मुक्त बीज गन्ना उपलब्ध कराया जाएगा। यह पहल गन्ने की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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ICAR का ‘शटपदा टर्मिनेटर'

दलहनी फसलों के लिए नई ढाल, ICAR का ‘शटपदा टर्मिनेटर’

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने “शटपदा टर्मिनेटर” नाम का एक नया ईको-फ्रेंडली बायोपेस्टिसाइड विकसित किया है, जो Helicoverpa armigera जैसे कीटों से चना, अरहर और अन्य दलहनी फसलों की रक्षा करता है। यह Bacillus thuringiensis var. kurstaki से बना है, इसलिए पर्यावरण के लिए सुरक्षित है। दलहनी फसलों को कीटों से बचाने के लिए…

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ICAR-DRMR, भरतपुर

अब देर से बुवाई में भी मिलेगी अच्छी सरसों की फसल, जानिए नई किस्म ‘BPM-11’ के फायदे

ICAR-DRMR, भरतपुर ने सरसों की नई किस्म ‘BPM-11’ विकसित की है, जो देर से बोई जाने वाली सिंचित भूमि में भी 18.59 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज देती है।यह किस्म 123 दिन में पकती है, इसमें 37.8% तेल होता है और यह White rust, Alternaria blight, Downy mildew जैसी बीमारियों से सुरक्षित रहती है।

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गेहूं में ज्यादा पैदावार चाहिए?

गेहूं में ज्यादा पैदावार चाहिए? तो अपनाइए बुवाई का ये तरीका

गेहूं की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को बीज हाथ से बिखेरने के बजाय कतारों में बुवाई करनी चाहिए। इससे बीज और खाद बराबर मात्रा में मिट्टी में जाते हैं, पौधों को पर्याप्त धूप, पानी और पोषण मिलता है, और फसल स्वस्थ रहती है।

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रबी सीजन में गन्ने की खेती

रबी सीजन में गन्ने की खेती का सही समय क्या है? जानिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, गन्ने की बुवाई का सही समय 15 नवंबर तक है। इसके बाद ठंड बढ़ने से अंकुरण कम होता है।हर 12–15 दिन में सिंचाई करें और 25–30 दिन बाद निराई-गुड़ाई जरूर करें।बेहतर पैदावार के लिए Co 0232, Co 0233, संकेश्वर 049 जैसी उन्नत किस्में अपनाएं।खेत में गोबर खाद + ट्राइकोडर्मा और NPK (300:100:200) का प्रयोग करें।

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सरकार ने बढ़ाया अमोनियम सल्फेट का उपयोग

यूरिया पर निर्भरता घटाने की तैयारी, सरकार ने बढ़ाया अमोनियम सल्फेट का उपयोग

सरकार ने रबी सीजन 2025-26 से अमोनियम सल्फेट को यूरिया का बेहतर विकल्प बनाकर सब्सिडी योजना (NBS) में शामिल किया है। अब किसानों को इस खाद पर ₹9,479 प्रति टन की सब्सिडी मिलेगी, जिससे इसकी कीमत घटकर लगभग ₹700 प्रति बोरा रह जाएगी।विशेषज्ञों के अनुसार, अमोनियम सल्फेट मिट्टी के लिए यूरिया से ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि यह धीरे-धीरे नाइट्रोजन छोड़ता है और सल्फर की पूर्ति करता है।

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पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 35

पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 35: सरसों की खेती में नई क्रांति

ICAR-IARI ने सरसों की नई किस्म पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 35 (PDZ 14) विकसित की है, जो चार प्रमुख रोगों से सुरक्षित है और 132 दिनों में तैयार होकर 21.48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है। इसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के लिए मंजूरी मिली है।

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