उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद में बिहार के किसानों को कम लागत में अधिक गन्ना उत्पादन की दी गई ट्रेनिंग

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बिहार के 40 किसानों के लिए “गन्ना एवं चीनी उत्पादन में सार्थक वृद्धि” विषय पर पाँच दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 10 से 14 सितंबर 2024 तक चला, जिसमें 25 वैज्ञानिकों ने गन्ना खेती और उत्पादन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।

प्रशिक्षण में व्याख्यान के साथ-साथ प्रायोगिक जानकारी भी दी गई। किसानों को प्रयोगशाला भ्रमण और रिसर्च एरिया भी दिखाया गया, वैज्ञानिकों द्वारा लाइव डेमो के माध्यम से आधुनिक गन्ना खेती की तकनीकें समझाई गईं। इन सत्रों का उद्देश्य था कि किसान इन तकनीकी ज्ञान को अपने खेतों में अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें।

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प्रशिक्षण के अंत में किसानों की परीक्षा भी ली गई, जिसमें राकेश कुमार प्रथम स्थान पर रहे, दुर्गेश कुमार द्वितीय स्थान पर और काशीलाल प्रसाद तृतीय स्थान पर रहे। प्रशिक्षण के बाद किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। गोपालगंज के सतीश तिवारी ने कहा कि गन्ने की बुवाई से लेकर कटाई तक की सभी नवीनतम विधियाँ वैज्ञानिकों द्वारा बारीकी से बताई गईं, जिन्हें हम अपनाएँगे और अन्य किसानों को भी बताएँगे। मझवलिया चीनी मिल के अनिल कुमार यादव ने कहा, “मैं शाहजहांपुर की धरती को नमन करता हूँ, जहाँ गन्ना खेती पर इतने शोध कार्य हो रहे हैं। यहाँ जो ज्ञान मिला, वह अंधेरे में प्रकाश के समान है।”

प्रशिक्षण दल का नेतृत्व कर रहे उप कृषि निदेशक, ईख विकास, मोतिहारी के विनय सिंह ने कहा कि यह प्रशिक्षण हमारी अपेक्षाओं से कहीं अधिक था, और हम सभी इससे पूर्ण संतुष्ट हैं।

समापन सत्र में प्रभारी अधिकारी डॉ. शिवपाल सिंह ने किसानों का आभार व्यक्त किया और उनसे आग्रह किया कि यहाँ से प्राप्त ज्ञान को अपने प्रदेश के अन्य किसानों के साथ साझा करें। प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव पाठक ने बताया कि बिहार से 40 किसानों का एक और दल 27 सितंबर को और दूसरा 20 अक्टूबर 2024 को गन्ना शोध परिषद आएगा।

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समापन सत्र में परिषद के वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार तिवारी, डॉ. एस.पी. यादव, डॉ. सुजीत प्रताप सिंह, डॉ. जी.एन. गुप्ता, और डॉ. सी.एस. पोसवाल भी उपस्थित रहे।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को गन्ना खेती की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने में सफल रहा और किसानों ने इसे सराहा, जिससे वे अपने उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रेरित हुए।
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